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आपने कभी सुना है तैरता हुआ बाजार, जहां नावों पर होती शॉपिंग…..

आपने बाजार बहुत देखें होंगे, जैसे कि रोड के किनारे, रेल की पटरियों पर, ठेले में लेकिन हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे बाजार के बारे में जो पानी में लगता है, जी हां यह तैरता हुआ बाजार है। आपको बता दूं कि कोलकाता में है यह बाजार जिसे 9 करोड़ की लागत से बनाया गया है। दरअसल ममता बनर्जी बैंकाक दौरे पर थी तो उन्होंने देखा कि यहां झील के ऊपर खूबसूरत बाजार लगा हुआ है जिस पर लोग शौक से झील का नजारा लेते हुए शॉपिंग कर रहें हैं। यही नही बाजार भी ऐसा कि जहां छोटी से लेकर बड़ी चीजें एक साथ मिलती हों।

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बस फिऱ क्या था कोलकाता आकर ममता ने भी बैंकाक की तर्ज पर यहां स्थित एक झील पर तैरता हुआ अद्भुत बाजार बना डाला। इस बाजार की खासियत यह है कि यहां 140 नावों पर दुकानें लगाई गई हैं।

इस बाजार को लगाने की एक और कहानी है। यहां दुकानें लगाने वाले लोग पहले सड़क के किनारे वाआईपी बाजार में अपनी दुकानें लगाते थे लेकिन सड़को के चौड़ीकरण की वजह से उन्हें यहां से हटना पड़ा। इन दुकानदारों के पुनर्वास के लिए ही सरकार ने उन्हें इस झील में इतनी बड़ी रकम की लागत से दुकानें उपलब्ध कराई।

कोलकाता के पाटुली झील में बना यह बाजार पूर्वी भारत का पहला तैरता बाजार है। इस बाजार में फल-फूल, सब्जी और मछली समेत हर वो चीज मिलती है जो आम लोगों की जिंदगी से जुड़ी हुई है।

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लगभग साढ़े चार सौ मीटर लंबे और 60 मीटर चौड़े बाजार में खरीददारों के लिए लकड़ी के पुल बनाये गए हैं जिन्हें वॉकवे कहा जाता है। और इस महानगर को उत्तर से दक्षिण को जोड़ने वाले ईस्टर्न बाइपास के किनारे यह बाजार स्थित है।

इस साल जनवरी के अंत में ही इस बाजार का उद्घाटन किया गया था, और पुराने ग्राहक जो कि सड़क के किनारे की शॉपिंग से ऊब गए इस तैरते हुए बाजार को लेकर काफी उत्सुक थे लेकिन एकाएक यहां से भीड़ गायब होने लगी है। लोग यहां अब खरीददारी करने के बजाय घूमने और सेल्फी लेने आ रहे हैं। जिससे दुकानदारों को अपने भविष्य को लेकर डर सताने लगा है।

इसके अलावा एक और कारण है, धूप और बरसात जिससे ग्राहकों को परेशानी होती है क्योंकि दुकानदार तो दुकानों में बैठे रहते हैं लेकिन खरीददारी करने वालों लोगों के लिए कोई छाया नही है।

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दुकानों के लिए बनी रेंलिंग के कारण लोग शॉपिंग करने के लिए नावों में नही उतर सकते और ना ही उसके करीब आ सकते। यहां पानी की गहराई भी काफी है जहां लोंगो के खासकर छोटे बच्चों के डूबने का खतरा बना रहता है।

खरीददारों की घटती संख्या को देखते हुए अब दुकान लगाने वाले लोग अलग-अलग चीज बेंचने लगें है जिससे लोगों को लुभाया जा सके साथ ही सरकार भी विशेषज्ञों की सलाह लेकर इस बाजार को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने की कोशिश कर रही है।

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