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एमके स्टालिन ने लिखा ऐसा खत कि पढ़कर हर कोई हैरान है !

7 अगस्त की शाम को आई एक खबर ने लोगों को झटका दे दिया था. खबर यह थी कि तमिलनाडु के 5 बार मुख्यमंत्री रहे करूणानिधि का निधन हो गया है. एक लम्बे समय से बीमार चल रहे करूणानिधि ने 7 अगस्त को आखिरी सांस चेन्नई के कावेरी अस्पताल में ली. इस खबर के बाद राजनीतिक जगत के साथ पूरे देश में शौक की लहर दौड़ गयी. 8 अगस्त को उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा. उनके अंतिम दर्शन के लिए देश के बड़े-बड़े नेता पहुंचे रहे हैं. पीएम मोदी जी ने भी चेन्नई पहुंचकर उनके उन्हें श्रद्धांजलि दे दी है.

तमिलनाडु को दो साल में दोहरा झटका 

करूणानिधि के निधन से तमिलनाडु को दो साल के अंतराल में दोहरा झटका लगा है. इन दो सालों में राज्य ने दो दिग्गज नेताओं को खो दिया है. बता दें इससे पहले एआई़डीएमके प्रमुख जयललिता जी का लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया था, अभी ज्यादा समय नही हुआ कि तमिलनाडु की जनता ने एक और दिग्गज नेता को खो दिया है. करूणानिधि के निधन ने लोगों को गहरे सदमे में पहुंचा दिया है. उनके निधन के बाद पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन ने अपने पिता के नाम खत लिखा है. इस खत में उन्होंने कुछ ऐसा लिखा है कि जानकर आप भी चौंक जायेंगे.

करूणानिधि के बेटे उन्हें अप्पा नहीं बल्कि ये कहकर पुकारते थे 

पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और करूणानिधि के बेटे एमके स्टालिन ने अपने पिता के नाम खत लिखते हुए एक ऐसी बात बताई है कि जानकर आप भी चौंक जायेंगे. उन्होंने भावुक होते हुए खत में लिखा है कि मैंने अपने जीवन में आपको कभी अप्पा यानि पिता नहीं कहा. अधिकतर समय आपको थलैवा यानि कि नेता कहकर ही पुकारता रहा. लेकिन क्या मैं अब आपको “अप्पा” कहकर पुकार सकता हूँ. उन्होंने अपने खत में लिखा है कि “आप दुनिया में कहीं भी जाते थे तो वापस आकर वहां के बारे में बताया करते थे लेकिन इस बार आप मुझे बिना बताये कहाँ चले गये? अचानक आप हम सब लोगों को छोड़कर कहाँ चले गये?

गौरतलब है कि स्टालिन ने आगे खत में लिखा है कि “आपने कहा था कि आपकी कब्र पर ये शब्द अंकित होने चाहिए कि वह व्यक्ति जिसने बिना आराम किये काम किया था, अब यहां आराम कर रहा है. क्या आप तमिल समुदाय के लोगों के लिए कड़ी मेहनत करने की संतुष्टि के बाद ही हम सभी से विदा हुए हैं. या फिर ये देखने के लिए ऐसी जगह छुप गये हैं कि 80 साल के सार्वजनिक जीवन की उपलब्धियों को कोई पछाड़ पायेगा या नहीं?” इसके आगे स्टालिन ने लिखा है कि “मैंने तीन जून को आपके जन्मदिन के मौके पर आशीर्वाद माँगा था कि आप मुझमे अपनी योग्यता का आधा हिस्सा ही भर दें लेकिन क्या आप मुझे अपना दिल देंगे. वही दिल जिसे महान अन्ना (सीएन अन्‍नादुरई) ने आपको दिया था? स्टालिन ने लिखा है कि इसी साधारण दान से ही हम आपके अधूरे सपनों और विचारों को पूरा कर सकेंगे.” स्टालिन ने खत के आखिरी शब्दों में  ‘अश्रुओं के साथ एमके स्‍टालिन.’ लिखकर हस्ताक्षर किये हैं. स्टालिन के भावुक खत को पढ़ने वाले हर शख्स की आँखें नम हैं.

News Source-Zeenews